नाखून हैं बीमारी का आइना



गोपाल राजू की चर्चित पुस्तक, 'हस्त रेखाओं से रोग परीक्षण' का सार-संक्षेप
रूड़की – २४७ ६६७ (उत्तराखंड)
    अधिकांशतः हाथ की उँगलियों के नाखूनों को बस हाथों की सुन्दरता के रूप में ही देखा जाता है। महिलाओं में तो यह विशेष रूप से आकर्षण का कारण होते हैं। इनकी देख-रेख का ध्यान मात्र सुन्दरता और आकर्षण के लिये ही किया जाता है। परन्तु हस्त रेखा शास्त्र में यदि जाएं तब पता चलता है कि नाखून व्यक्ति के स्वस्थ्य शरीर का एक आइना भी हैं। यदि धैर्य और गंभीरता से नाखूनों के रंग, रूप, बनावट, उनमें उभरते हुए विभिन्न चिन्हों की भाषा आदि को समझने का यत्न किया जाए तो अनेकों बीमारियों का लक्षण बताने में यह बहुत ही उपयोगी सिद्ध हो सकते हैं। अनेक चिकित्सकों को बीमार के नाखूनों का परीक्षण करते हुए सबने प्रायः देखा भी होगा।
    अवस्था भेद से नाखून चार प्रकार के होते हैं - लम्बे, छोटे, चौड़े और तंग। जिन व्यक्तियों के नाखून लम्बे होते हैं उनका सीना अथवा फेफड़े कमजोर होते हैं। शारीरिक शक्ति भी उनमें सामान्य से कम होती है। यह शक्ति और भी कम होती है यदि नाखून सिरे के नीचे उँगली की ओर एक पोर से दूसरे पोर तक अधिक मुड़ा हो। पड़ी रेखाओं युक्त अत्यधिक लम्बे नाखून व्यक्ति को किसी न किसी रोग से पीड़ित करते हैं।
    अत्यधिक छोटे नाखून दमा, शीत तथा गले के विभिन्न रोगों से पीड़ित करते हैं। प्रायः नाखून के मूल में नाखून के रंग से हटकर चन्द्रकार आकृति दिखाई देती हैं। यह आकृति ही चन्द्र कहलाती हैं। यह चन्द्र अत्यधिक बड़े नहीं होने चाहिए और न ही उतने छोटे कि नाखून के मूल से निकले मात्र दिखलाई दें। सामान्य आकृति के यह चिन्ह एक स्वस्थ शरीर के प्रतीक हैं। अत्यधिक छोटे नाखून पर चन्द्र की अनुपस्थिति वाले लम्बे, सिरे पर चौड़े तथा नीचे मूल पर नीलिमा युक्त नाखून शरीर में असामान्य रक्त प्रवाह तथा हृदय रोग होने का संकेत देते हैं।
    अत्यधिक बड़़े आकार के नाखून पर उपस्थित चन्द्र रक्त प्रवाह की शीघ्रता दर्शाते हैं। ऐसे व्यक्ति अपनी क्षमता से अधिक कार्य करने की शक्ति रखते हैं। परन्तु इसके परिणाम स्वरूप सम्भावना यह रहती है कि रुधिर का प्रवाह मस्तिष्क की और बढ़ने के कारण मूर्छा, मिर्गी, पक्षाघात, अर्धांग अथवा वायु रोग हो सकते हैं। ऐसी आकृति वाले नाखून के व्यक्ति कोई भी नशा जैसे शराब, भांग, चरस आदि का सेवन करते हैं तो उनकी धर्मानियों पर रक्त के अत्यधिक प्रवाह से उत्पन्न दबाव के कारण धमनी फट भी सकती हैं।
    चन्द्र की अनुपस्थिति, पतले, तथा नीचे से चपटे आकार वाले नाखून, जो मांस में धँसने से प्रतीत होते हैं, व्यक्ति को लकवे का रोगी बनाते हैं। अधिक लम्बे, ऊँचे तथा अधिक मुड़े हुए नाखून रीढ़ की हड्डी सम्बन्धी रोग देते हैं।
    प्रायः देखा जाता है कि अत्यधिक परिश्रम अथवा किसी लम्बी बीमारी से पूर्व अथवा बाद में नाखून पर सफेद धब्बे पड़ जाते हैं। इसका अर्थ होता है मस्तिष्क तथा स्नायविक जाल पर आवश्यकता से अधिक तनाव बढ़ जाना। यदि यह सफेद धब्बे नाखून पर वैसे ही दिखाई दें तो समझना चाहिए कि व्यक्ति स्नायविक रोग का शिकार हो रहा है अथवा उसकी स्नायविक शक्ति का ह्रास हो रहा है।
    नाखूनों पर हल्का सा नील वर्ण संकेत देता है कि शरीर में पर्याप्त मात्रा में ऑक्सीजन नहीं मिल रही है। इससे फेफड़ों से सम्बन्धित अनेक रोग हो सकते हैं। नेल क्लबिंग अर्थात् लम्बे नाखून उँगलियों की तरफ मुड़ने लगें तब यह समस्या विकट रूप लेने लगती है। यदि नाखून खुश्क अर्थात् रुखे से हैं और बहुत ही कमजोर हो गए हों - बिल्कुल निर्जीव से तो भी यह फेफड़ों से जुड़ी गंभीर बीमारी की ओर संकेत करते हैं। यदि नाखून पर एक से अधिक सफेद धारियाँ आ गयी हैं तो यह शरीर के अन्दर पोषक तत्वों की कमी को दर्शाते हैं। ऐसे में अनेक रोग गुर्दे से सम्बधित हो सकते हैं।
    अन्दर से खोखले और बहुत ही नर्म नाखून शरीर में लोह खनिजों की कमी तथा लीवर से सम्बन्धित रोग दर्शाते हैं। यदि नाखून भंगुर हैं अर्थात स्वयं टूटने लगें तब यह भी शरीर में लोह तत्त्वों की कमी की ओर संकेत करते हैं। आयरन की कमी से शरीर में अनेक रोग जन्म लेने लगते हैं। इससे हीमोग्लोबिन, लिपिड प्रोफाइल आदि सब प्रभावित होने लगते हैं। शरीर में एनीमिया अर्थात् खूनकी कमी का यह बहुत ही स्पष्ट लक्षण होता है।
    नाखूनों की प्राकृतिक चमक धूमिल होने लगे तब इससे से सचेत हो जाएं क्योंकि यह ऍनेमिक होने का लक्षण है। ऐसे में मधुमेह और लीवर से जुड़ी अनेक बीमारियों की सम्भावनाएं हो सकती हैं। यदि नाखूनों पर काले धब्बे अथवा काली रेखाएं उभरने लगें तब यह निश्चित रूप से गम्भीर बीमारी का संकेत है।
    स्वस्थ शरीर के लिए नाखूनों से परख का सबसे अच्छा उपाय है - अपने नाखूनों को अंगूठे से दबाएं, इससे नाखून सफेद रंग में बदल जाएंगे। जब दबाव हटाएंगे तब उनमें गुलाबी रंग की आभा उभर आएगी। यदि ऐसा नहीं है अर्थात् दबाव हटने के बाद नाखूनों में सफेदी दिखाई दे तो समझ लें यह स्वास्थ्य की दृष्टि से अच्छा लक्षण नहीं है। दूसरा सबसे अच्छा प्रयोग है नाखूनों के मूल में स्थित चन्द्र की आकृति को ध्यान से देखें। या तो यह हों ही नहीं और यदि हों तो न तो बहुत सुक्ष्म हों और न ही बहुत बड़े । दोनों ही चिन्ह शरीर में सामुद्रिक शास्त्र में वर्णित अन्य लक्षणों के अनुरूप विभिन्न रोग दर्शाते हैं।


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