रत्ती से करें तंत्र के सरल प्रयोग



गोपाल राजू की पुस्तक 'तंत्रके सरल उपाय' का सार-संक्षेप
रत्ती


     
 सुन्दर से दिखने वाले लाल, काले और सफेद बीज सैकड़ों सालों से सोने और चांदी के वजन को नापने के लिए प्रयोग किए जाते रहे हैं। आदिवासी और जंगलों में रहने वाले इन रंग-बिरंगे सुन्दर बीजों को आभूषण के रूप में उपयोग करते थे।
    आज भी लगभग एक से वजन वाले यह बीज सुनारों के लिए एक मापन इकाई के रूप में जाने जाते हैं। इनके कुछ चर्चित नाम हैं गुंजा, चौटली, धुंधची, लडय्या, चश्मेखरूस, हब सुफेद, रत्ती आदि। इस का वानस्पतिक नाम है (Abrus Precatorius) ।
    आयुर्वेद में रत्ती का प्रयोग रोगों के निदान के लिए किया जाता है।
-   रत्ती लता की पत्तियों की चाय बनाकर पीने से सर्दी और खांसी में लाभ मिलता है।
-   मुँह में यदि छाले हैं तो इनकी पत्ती को चबाने से उनमें आराम मिलता है।
-   लता की जड़ का रस यदि नाक में एक बूंद डाला जाएं तो माइग्रेन में लाभ मिलता है।
-   शरीर पर कहीं भी चोट अथवा घाव हो और इसकी पत्तियों के रस का वहाँ पर लेपन कर दिया जाएं तो घाव जल्दी सूखने लगता है। 
-   पीलिया रोग में रत्ती लता के घटकों का तरह-तरह से उपयोग बताया गया है। परन्तु रोग निदान के क्रम-उपक्रम किसी योग चिकित्सक की देख-रेख और सुझाव से ही किया जाना चाहिए।
    पदार्थ तंत्र में रत्ती का व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। पाठकों के लाभार्थ कुछ सरल से उपाय यहाँ दे रहा हूँ। अपने बुद्धि और विवेक से लाभ उठायें।
1. जिस किसी स्त्री अथवा पुरुष को आकर्षित करना है उनका ध्यान करके पाँच लाल गुंजा शहद में डुबाकर रख दें। पाँच दिन तक इन्हें कुछ समय के लिए देखकर 

व्यक्ति का ध्यान कर लिया करें। पाँचवे दिन शहद सहित इन्हें कहीं वीराने में दबा दें।
2. शुक्लपक्ष की चतुर्थी को सफेद गुंजा कपड़े में बाँधकर घर में स्थापित कर लें। गणेश जी का ध्यान (गोपाल राजू की विधि से) नित्य किया करें, घर के सदस्यों में परस्पर स्नेह बनेगा।
3. लाल गुंजा की माला कभी-कभी धारणा किया करें इससे दूसरे व्यक्ति का सम्मोहन होगा।
4. धनतेरस को लाल गुंजा के 11 दाने तथा सफेद गुंजा के पाँच दाने और नागकेसर को एक धातु की डिब्बी में बंद करके रख लें। दीपावली के दिन यथाभाव इसकी पूजा करें, पूरे वर्ष आर्थिक पक्ष प्रबल रहेगा।

5. शत्रु को परास्त करना हो तो काली गुंजा के बीज घिसकर उसकी स्याही से बार-बार उसका नाम लिखें, कुछ दिन बाद सारी गुंजा कहीं दबा दें।
6. गुंजा की जड़ को ताबीज़ की तरह गर्भवती स्त्री की कमर में धारण करवा दें, सुरक्षित एवं प्रसवपीड़ा से उसकी रक्षा होगी।
7. होलिका दहन में 'ऊँ हौं जूं सः' मंत्र जप करते हुए अग्नि की ग्यारह बार उल्टी परिक्रमा कर लें, प्रत्येक परिक्रमा में एक गुंजा अपने ऊपर से उतारकर अग्नि में होम कर दें, शीघ्र स्वास्थ्य लाभ होने लगेगा।
8. 'ऊँ नमो अग्निरूपाय ह्रीं नमः' मंत्र जपकर सफेद गुंजा के दाने सिरहाने रखकर सोया करें, शत्रु भय नहीं सताएगा।
 


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