Friday, August 28, 2015

रत्ती से करें तंत्र के सरल प्रयोग



गोपाल राजू की पुस्तक 'तंत्रके सरल उपाय' का सार-संक्षेप
रत्ती


     
 सुन्दर से दिखने वाले लाल, काले और सफेद बीज सैकड़ों सालों से सोने और चांदी के वजन को नापने के लिए प्रयोग किए जाते रहे हैं। आदिवासी और जंगलों में रहने वाले इन रंग-बिरंगे सुन्दर बीजों को आभूषण के रूप में उपयोग करते थे।
    आज भी लगभग एक से वजन वाले यह बीज सुनारों के लिए एक मापन इकाई के रूप में जाने जाते हैं। इनके कुछ चर्चित नाम हैं गुंजा, चौटली, धुंधची, लडय्या, चश्मेखरूस, हब सुफेद, रत्ती आदि। इस का वानस्पतिक नाम है (Abrus Precatorius) ।
    आयुर्वेद में रत्ती का प्रयोग रोगों के निदान के लिए किया जाता है।
-   रत्ती लता की पत्तियों की चाय बनाकर पीने से सर्दी और खांसी में लाभ मिलता है।
-   मुँह में यदि छाले हैं तो इनकी पत्ती को चबाने से उनमें आराम मिलता है।
-   लता की जड़ का रस यदि नाक में एक बूंद डाला जाएं तो माइग्रेन में लाभ मिलता है।
-   शरीर पर कहीं भी चोट अथवा घाव हो और इसकी पत्तियों के रस का वहाँ पर लेपन कर दिया जाएं तो घाव जल्दी सूखने लगता है। 
-   पीलिया रोग में रत्ती लता के घटकों का तरह-तरह से उपयोग बताया गया है। परन्तु रोग निदान के क्रम-उपक्रम किसी योग चिकित्सक की देख-रेख और सुझाव से ही किया जाना चाहिए।
    पदार्थ तंत्र में रत्ती का व्यापक रूप से प्रयोग किया जाता है। पाठकों के लाभार्थ कुछ सरल से उपाय यहाँ दे रहा हूँ। अपने बुद्धि और विवेक से लाभ उठायें।
1. जिस किसी स्त्री अथवा पुरुष को आकर्षित करना है उनका ध्यान करके पाँच लाल गुंजा शहद में डुबाकर रख दें। पाँच दिन तक इन्हें कुछ समय के लिए देखकर 

व्यक्ति का ध्यान कर लिया करें। पाँचवे दिन शहद सहित इन्हें कहीं वीराने में दबा दें।
2. शुक्लपक्ष की चतुर्थी को सफेद गुंजा कपड़े में बाँधकर घर में स्थापित कर लें। गणेश जी का ध्यान (गोपाल राजू की विधि से) नित्य किया करें, घर के सदस्यों में परस्पर स्नेह बनेगा।
3. लाल गुंजा की माला कभी-कभी धारणा किया करें इससे दूसरे व्यक्ति का सम्मोहन होगा।
4. धनतेरस को लाल गुंजा के 11 दाने तथा सफेद गुंजा के पाँच दाने और नागकेसर को एक धातु की डिब्बी में बंद करके रख लें। दीपावली के दिन यथाभाव इसकी पूजा करें, पूरे वर्ष आर्थिक पक्ष प्रबल रहेगा।

Tuesday, August 25, 2015

धनवान बनने के सरलतम उपाय

मानसश्री गोपाल राजू की धनप्रदायक पुस्तकों (सरलतम धनदायक तांत्रिक प्रयोग) के संक्षिप्त सार-संक्षेप
                
 Gopal Raju

    'अध्यात्म में चाहिए नाम और संसार में चाहिए दाम' वाली  कहावत बिल्कुल ठीक है। परन्तु हमारा सबसे बड़ा दुभार्ग्य यही है कि न तो हम अध्यात्म का सीधा-सच्चा मार्ग अपना पा रहे हैं और ना ही धन के लिए हमारी हवस पूरी हो पा रही है। परिणाम सबके सामने हैं -ईर्ष्या, द्वेष, रोग, शोक, दारिद्रय, मानसिक, संत्रास आदि । इन सबका मूल कारण है प्रकृति, प्रभु प्रदत्त घटकों, संस्कारों तथा परम्परागत चली आ रही धार्मिक आस्थाओें पर अविश्वास और उनका तिरस्कार। प्रस्तुत लेख में कुछ ऐसी ही तिरस्कृत आस्थाओं का उल्लेख कर रहा हूँ, इन्हें श्रद्धा से अपनाएँ और नाम तथा दाम पाने का मार्ग प्रशस्त करेंः
1.  भगवती लक्ष्मी को नित्य प्रातः लाल पुष्प अर्पित करके दूध से बनी मिठाई का भोग लगाएं, धन लाभ होगा।

2.  मंगल तथा शनिवार को पीपल के एक पत्ते पर 'राम' लिखकर उसपर कोई मिष्ठान रखें और हनुमान जी के मन्दिर में चढ़ा दिया करें, धन की प्राप्ति होगी।
3.  काली मिर्च के 5 दाने अपने सिर के ऊपर से सात बार घुमाकर 4 दाने चारों दिशा में तथा एक आकाश की ओर उछाल दें, अकस्मात् धन लाभ मिलेगा।
4.  शनिवार के दिन पीपल का एक अखण्डित पत्ता तोड़ लाएं, उसे गंगाजल से धोकर उसके ऊपर हल्दी तथा दही के घोल से अपने दाएं हाथ की अनामिका उँगली से एक वर्ग बनाकर  उसके अन्दर 'ह्री' अंकित कर दें। सूखने पर पत्ता मोड़कर अपने पर्स में रख लें। तदन्तर में प्रत्येक शनिवार को यह उपक्रम करते रहें। धन से आपका पर्स रिक्त नहीं रहेगा।

5.  यदि धन लाभ का मार्ग अवरुद्ध हो रहा हो तो शुक्रवार के दिन से नित्य गोधूलि बेला में श्री महालक्ष्मी के सामने अथवा तुलसी के पौधे के नीचे गोघृत का दीपक जलाएं।
6.  शुक्ल पक्ष के प्रथम शुक्रवार से लगातार तीन शुक्रवार तक सांय काल लक्ष्मी मन्दिर में जाकर नौ वर्ष से छोटी ग्यारह कन्याओं को मिश्री मिश्रित खीर का भोजन कराएं, उपहार में लाल चमकीले वस्त्र देकर उन्हें प्रसन्न करें, धन लाभ होगा।
7. उधार वाला यदि पैसे न दे रहा हो तो रात्रि में किसी                 चौराहे पर जाकर छोटा सा गड्ढा खोदें। उस व्यक्ति का    नाम लेते हुए एक गोमति चक्र उसमें दबा दें। यदि उस   गड्ढे पर नीबूं निचोड़ दें तो प्रभाव अधिक अच्छा होगा।
8.  झाडू सदैव ऐसे स्थान पर रखें जहाँ से दिखाई न दें, धन लाभ का यह अच्छा उपक्रम सिद्ध होगा।
9.  यदि अकस्मात् धन पाने की इच्छा हो तो सोमवार के दिन श्मशान में स्थित महादेव मंदिर में जाकर दूध में शहद मिलाकर देव को अर्पित करें।

10. प्रत्येक अमावस्या अथवा शनिवार को पूरे घर की सफाई करके घर के मंदिर में धूप-दीप दिखाने का नियम बनाने से घर में धन का आगमन होता है।
11. यदि वाद-विवाद तथा दुर्घटना आदि के कारण धन का अपव्यय हो तो चमकीले लाल वस्त्र तथा लाल मसूर का उपयोग न करें।
12. शुक्ल पक्ष के प्रथम सोमवार को 11 अभिमंत्रित गोमती चक्रों को पीले कपड़े में रखकर उन सभी पर हल्दी से तिलक करें और शिवजी का स्मरण करते हुए कपड़े को पोटली का रुप दें। उस पोटली को हाथ में लेकर सारे घर में घूमते रहें, बाहर निकलकर बहते जल में प्रवाहित कर दें, धन हानि नहीं होगी।
13. अगर धन संचय नहीं हो रहा है तो तिजोरी में लाल वस्त्र बिछाएं। तिजोरी में गुंजा के बीज रखने से धन की प्राप्ति होती है।

14. किसी गुरूवार को 3 अभिमंत्रित गोमती चक्र, 3 धनकारक पीली कौड़ी तथा हल्दी की 3 गांठ को एक साथ किसी पीले कपड़े से  बांध कर तिजोरी में रख दें, धन की वृद्धि होगी।
15. अचानक धन की प्राप्ति के लिए अपनी मनोकामना कहते हुए बरगद की जटा में गांठ लगा दें। धनलाभ के बाद उसे खोल दें।
16. गोलक में छेद करके शोधित श्रीलक्ष्मी फल उसमें रख दें नित्य उसे धूप-दीप दिखाएं। अब इसमें पैसे डालते रहें, आपकी गोलक कम समय में ही भरने लगेगी।
17. किसी भी मुहूर्त में श्रीलक्ष्मी फल को लाल कपड़े पर स्थापित करें। उस पर कामिया सिंदूर, देसी कपूर एवं अखण्डित लौंग चढ़ाकर और धूप-दीप दिखाकर मुद्रा अर्पित करके धन रखने के स्थान पर रख दें, इससे आशातीत धन लाभ होगा।
18. काली हल्दी को सिंदूर और धूप दिखाकर लाल वस्त्र में लपेटकर एक दो मुद्रा सहित बक्से में रख लें। इसके प्रभाव से धन की वृद्धि होती रहेगी।
19. 11 कौड़ियों को शुद्ध केसर से रंगकर पीले कपड़े में बांधकर धन स्थान पर रखने से धन का आगमन होता है।

20. किसी सोमवार को नागकेसर के 5 फूल 5 बिल्वपत्रों पर अलग-अलग रखकर शिवलिंग पर चढ़ाएं। इससे पूर्व शिवलिंग को कच्चे दूध, दही, शुद्ध घी, शहद, देसी शक्कर तथा गंगाजल से धोकर पवित्र कर लें 5 सोमवार यह प्रयोग करते रहें। अतिंम दिन चढ़ाए बिल्वपत्र तथा नागकेसर के फूल को घर, दुकान, फैक्ट्री आदि में धन रखने के स्थान में रख दें। इसके प्रभाव से अपार धन-सम्पदा अर्जित करने का मार्ग प्रशस्त होगा।
21. एक नए चमकीले पीले वस्त्र में नागकेसर, हल्दी, साबुत सुपारी, एक पुराना सिक्का, तांबा तथा अक्षत रखकर पोटली बना लें। इसे श्रीलक्ष्मी के सम्मुख रखकर धूप-दीप से पूजन करके सिद्ध कर लें। इसे तिजोरी में स्थापित कर दें, तिजोरी धन से रिक्त नहीं रहेगी।
22. जिस सधन वृक्ष पर चमगादड़ों का स्थाई वास हो, उसकी छोटी सी लकड़ी शुभ मुहूर्त में  किसी रात को निमंत्रण देकर प्रातः काल ब्रह्मबेला में तोड़ लाएं। इसे अपने कार्यस्थल की कुर्सी में अथवा गद्दी के नीचे रख दें। धन को आकर्षित करने का इसमें विलक्षण गुण-धर्म छिपा है।

23. रात्रि काल के समय रसोई समेटने के बाद नित्य चाँदी की कटोरी में लौंग तथा कपूर जला दिया करें धन-धान्य से आपका घर भरा रहेगा।
24. नवार्ण प्राण प्रतिष्ठित 'श्री लक्ष्मी कवच' को सर्वार्थ सिद्धि योग में धारण करें। फिर एकांत स्थल में उसे किसी छोटे से आम के पौधे को दोनों हाथों से  स्पर्श करके अपनी फर्म आदि का नामोल्लेख करते हुए श्री महालक्ष्मी का ध्यान करें। इससे आपके व्यापार का अवश्य ही धन लाभ होगा।
25. गोबर से लीपकर एक स्थान को शुद्ध करें। उस पर हल्दी से एक त्रिकोण बना लें। उसमें अपनी फर्म, दुकान आदि का नाम लिखकर सिंदूर का तिलक लगाएं। अब उस पर कम्बल बिछाकर बैठ जाएं और प्रतिदिन कम से कम 15 मिनट श्री महालक्ष्मी का ध्यान करें, धन लाभ मिलना प्रारम्भ हो जाएगा।
26. दुकान में तिजोरी के पास लक्ष्मी-नारायण की तस्वीर लगाएं। दुकान खुलते ही मनोभाव से लक्ष्मी जी की पूजा करके फिर बैठें, धन लाभ होगा।
27. जिस प्रकार दुकान खोलते समय पूजा-अर्चना करते हैं उसी प्रकार दुकान बन्द करते समय भी कुछ करें। चलते समय दो अगरबत्ती जला दिया करें, बरकत रहेगी।
28. समस्त कार्यों से निवृत्त होकर रात्रि 10 बजे के पश्चात् उत्तर दिशा की ओर मुँह करके पीले आसन पर बैठ जाएं। अपने सामने तेल के 9 दीपक जला लें। यह दीपक साधनाकाल तक जलते रहें। दीपक के सामने लाल रंग के चावलों की एक ढेरी बना लें। उस पर एक श्रीयंत्र रखकर कुंकुम, पुष्प, धूप, तथा दीप से उसका यथाभाव पूजन करें। उसके बाद किसी धातु की प्लेट पर स्वस्तिक बनाकर उसे सामने रखकर उसका पूजन करें। इस प्रयोग से धन लाभ होगा।

29. श्रीयंत्र को पूजा के स्थान में रखकर उसकी नियमानुसार पूजा करें। फिर लाल कपड़े में लपेटकर उसे धन स्थान पर स्थापित कर दें, धन लाभ होने लगेगा।
30. तांम्रपत्र पर बने प्राण-प्रतिष्ठित श्रीयंत्र को घर के ईशान कोण में स्थापित करके पूजा करें, विविध ऐश्वर्य के साथ धन लक्ष्मी को प्राप्ति होगी।
31. तिथियों के आधार पर अनुलोम-विलोम क्रिया (एक तारीख को क्रमशः एक, दो को दो आदि) से नित्यप्रति घी के दीपक घर में जलाने से परिवार में कभी कलह, अशान्ति नहीं होती तथा लक्ष्मी की विशेष कृपा बनी रहती है।
32. एक नारियल को चमकीले लाल वस्त्र में लपेटकर धन स्थान पर रखने से धन में निरन्तर वृद्धि होती है।

33. जिस घर में एकाक्षी नारियल होता है, वहाँ स्वयं लक्ष्मी वास करती हैं। धन प्राप्ति के लिए किसी भी देवी स्वरूप की उपासन करें और प्रतिदिन देवी पर लौंग अर्पित करें।
33. जिस घर में प्रतिदिन 'श्री सूक्त' का पाठ होता है, वहाँ श्री लक्ष्मी का स्थाई वास होता है।
34. गुरु पुष्य नक्षत्र में स्नानादि से पवित्र होकर पीले रंग के रुमाल में एक हल्दी की गांठ रखें। हल्दी मिश्रित चावलों से रंगकर एक नारियल तथा एक साबुत सुपारी भी उसपर अर्पित करें। धूप-दीप दिखाकर हल्दी में रंगा एक प्राचीन सिक्का उसपर रखकर तदन्तर में नित्य धूप-दीप दिखाते रहें, इस टोटके से धन-धान्य में वृद्धि होगी।

35. रवि-पुष्य नक्षत्र में कुशामूल लाकर उसे गंगाजल से स्नान कराकर देव प्रतिमा की भाँति पूजन करें और लाल कपड़े में लपेटकर तिजोरी में स्थापित कर दें। नित्य प्रति उसको धूप-दीप दिखाएँ, धनवृद्धि होने लगेगी।
36. घर के मुख्य द्वार के ऊपर गणेश जी की प्रतिमा अथवा चित्र इस प्रकार लगाएं कि उनका मुहँ घर के अन्दर की ओर रहे, इससे धना का आगमन होने लगेगा।
37. प्रत्येक शनिवार को घर से मकड़ी के जाले, रद्दी तथा टूटी-फूटी बेकार सामग्री आदि हटाने पर लक्ष्मी का वास होने लगता है।
38. शुक्रवार को कमल का पुष्प लाल वस्त्र में लपेटकर अपनी तिजोरी में रखने से धन का आगमन होने लगता है।

39. घर के मुख्य द्वार पर प्रतिदिन सरसों के तेल का दीपक जलाएं। दीपक बुझ जाने पर बचे हुए तेल को संध्या काल में किसी पीपल के वृक्ष की जड़ में चढ़ा दें। इस प्रकार सात शनिवार तक करने से घर में धन का आगमन होने लगता है।
40. पीपल के वृक्ष के नीचे शिव-प्रतिमा स्थापित करके प्रातःकाल उस पर जल चढ़ाएँ और धूप-दीप दिखाकर पूजा अर्चना करें। इसके बाद 5 माला 'ऊँ नमः शिवाय' मंत्र का जप करें। सायं काल भी प्रतिमा का पूजन करें, धन लाभ होने लगेगा।
41. किसी शुभ मुहूर्त में हल्दी से रंगी 11 अभिमंत्रित धनदायक कौड़ियाँ पीले वस्त्र में बांधकर धन के स्थान पर रख लेने से धन की स्थिरता बनी रहती है।
42. दीपावली के दिन पीले वस्त्र में काली हल्दी के साथ एक चाँदी का सिक्का धन स्थान में रखने से लक्ष्मी की कृपा बनी रहती है।

43. काले चावलों को चमकीले लाल वस्त्र में लपेटकर धन स्थान में रखने से आर्थिक स्थिरता बनी रहती है।
44. मोती शंख का चूर्ण बनाकर पानी में मिलाकर यदि लक्ष्मी जी को स्नान कराया जाए तो धन की कमी दूर होने लगती है।
45. प्रत्येक गुरुवार को तुलसी के पौधे में दूध अर्पित करने पर आप आर्थिक रूप से अवश्य ही सक्षम होंगे।
46. किसी भी मास के प्रथम शुक्रवार को लाल कमल पुष्प ले आएं। उस पर रोली से तिलक लगाकर लाल कपड़े में रखकर धूप-दीप दिखाएं। उसे धन स्थान में स्थापित कर दें, धन लाभ होगा।
47. कच्ची धानी के दीपक में फूलदार लौंग डालकर हनुमान जी की आरती करें। इससे अनिष्ट दूर होगा और धन-धान्य प्राप्त होगा।

48. पीपल के वृक्ष की जड़ में सरसों के तेल का दीपक जलाकर बिना पीछे मुड़कर देखें घर लौट आएं, धन लाभ होगा।
49. देवी लक्ष्मी के चित्र के सामने नौ बत्तियों का शुद्ध घी का दीपक जलाएं, उस दिन धन लाभ अवश्य होगा।
50. एक नारियल पर कामिया सिंदूर, मौली तथा बासमती चावल अर्पित करके पूजन करें, फिर उसे हनुमान मन्दिर में जाकर चढ़ा आएं, धन लाभ होगा।
51. श्री महालक्ष्मी का ध्यान करके मस्तक पर शुद्ध केसर का तिलक करके कार्य पर निकले धन लाभ के शुभ समाचार मिलेंगे।
52. मुख्य द्वार के बाहर शुद्ध केसर से स्वस्तिक बनाकर उसपर पुष्प, अक्षत तथा शहद चढ़ाएँ, लक्ष्मी का घर में आगमन होगा।
53. दो पीले पुष्प श्री महालक्ष्मी पर अर्पित करें, धन लाभ होगा।

54. श्री गणेश को दूर्वा और मोतीचूर के लडुड्ओं का भोग लगाकर श्री लक्ष्मी के चित्र के सामने शुद्ध घी का दीपक जलाएं, धन की कमी नहीं रहेगी।
55. चांदी से बने अभिमंत्रित लॉकेट में शुद्ध मोती तथा मूंगा जड़वाकर गले में धारण करें, धन बाधा दूर होगी।
56. श्रीफल को लाल वस्त्र पर रखकर कामिया सिंदूर, देसी कपूर तथा लौंग चढ़ाकर धूप-दीप दिखाकर कुछ मुद्रा अर्पित करें। फिर लक्ष्मी मंत्र की 7 माला जपकर उसे धन स्थान में स्थापित कर दें, धन-धान्य की वृद्धि होगी ।

57. धन संचय करने के लिए किसी शुभ दिन लाल रेशमी रुमाल में अभिमंत्रित हत्था जोड़ी बांधकर घर में रखें।
58. 'श्री' अंकित कमलगट्टे को श्री महालक्ष्मी की प्रतिमा या चित्र के सामने रखकर उसपर चावल का ढेर बनाएं। लक्ष्मी मंत्र से इसकी पूजा करें। इस दाने को अपने पास सुरक्षित रखें, धन लाभ होगा। यदि श्वेतार्क गणपती के साथ चमकीले लाल वस्त्र में इसे तिजोरी में स्थापित करते हैं तो वह धन से रिक्त नहीं रहेगी।
59. अकस्मात् धन लाभ के लिए लक्ष्मी जी के मन्दिर में सुगन्धित धूप तथा गुलाब की अगरबत्ती का दान करें। यदि शुक्ल पक्ष के किसी शुक्रवार को यह टोटका करते हैं, तो शीघ्र धन लाभ होगा।

60. यदि धन लाभ की स्थिति बन रही हो, परन्तु फलीभूत न हो रही हो तो पीले चन्दन की 9 डलियां लेकर केले के वृक्ष पर पीले धागे से टांग दें, आशातीत फल मिलेगा।
61. शुक्ल पक्ष में सोमवार के दिन एक मुट्ठी साबुत बासमती चावल बहते हुए जल में लक्ष्मी जी का ध्यान करते हुए धीरे-धीरे बहा दें, धन लाभ होगा।
    ऐसे अनेक अन्य सैकड़ों प्रयोगों के लिए आप लेखक के विषय से सम्बधित पुस्तकें भी पढ़ सकते हैं अथवा इन्टरनॅट पर गोपालराजू सर्च करके उनके ब्लॉग्स या वेबसाइट पर भी जा सकते हैं। परन्तु एक आवश्यक बात सदैव याद रखे कि फल मिलना न मिलना अन्ततः निर्भर करता है  

Tuesday, August 18, 2015

नज़र दोष से कैसे पायें छुटकारा

मानसश्री गोपाल राजू (Gopal Raju) (वैज्ञानिक)

 नज़र दोष

    नज़र लग गयी, नज़र लगना, नज़र दोष, पत्थर फोड़ नज़र, नज़र का असर, नज़र दोष के कारण बीमारी, नज़र दोष के कारण उन्नति अवरुद्ध, नज़र दोष के कारण सुख-समृद्धि का पलायन, नज़र दोष के कारण व्यापार बंद हो गया, नज़र दोष से घर-परिवार त्रस्त है - ऐसे अथवा नज़र दोष से मिलते-जुलते अन्य अनेकों शब्द आपके कानों में अवश्य आते होंगे। क्या नज़र वास्तव में लगती हैं? क्या नज़र दोष होता है ? क्या नज़र दोष से घर-परिवार नष्ट होने लगते है? क्या उन्नति में निरन्तर बाधाएं आने लगती हैं? क्या नज़र दोष असाध्य रोगों का कारण बन जाता है ? ऐसे अनेकों प्रश्न भी अवश्य ही उठते होंगे सबके मन में।
    क्या यह सब सत्य है, मन का वहम है अथवा अंधविश्वास ? जो कुछ भी सार-सत है इस विषय के पीछे, वह एक अलग विषय है। परन्तु यह सत्य है कि अच्छे-अच्छे बौद्धिक वर्ग, विषय को न मानने वाले नास्तिक और यहाँ तक अनेक धर्मावलम्बियों को नज़र दोष के भय से पीड़ित होते देखा गया है और नहीं तो कम से कम वह भयभीत अवश्य हैं किसी अज्ञात भय के कारण।
नजर किसको लगती है
    यह तो सत्य है कि कमजोर मानसिकता वाले व्यक्ति को इस प्रकार की अनहोनी बातें कहीं न कहीं अवश्य सताती हैं। अनेकों अच्छे-भले खेलते-खाते बच्चों को अकारण रोगी होते, दर्द-पीड़ा से छटपटाते अथवा अज्ञात भय से भयभीत होते अवश्य देखा जाता है। अच्छी भली अनेक महिलाओं को कहते सुना होगा कि आज श्रृगांर करके निकली थी और अमुक की नज़र लग गयी फलस्वरूप  सिर दर्द अथवा अन्य कष्ट से पीड़ित हैं तब से। अच्छा भला कारोबार चल रहा था, अकस्मात् किसी की नज़र लग गयी और सब व्यवसाय चौपट हो गया।
अधिकांशतः महिलाओं और बच्चों को नज़र दोष से पीड़ित होते देखा जाता है। महिलाओं को तीन स्थितियों में सर्वाधिक नज़र दोष का प्रकोप होता है। एक तो जब वह विवाह के समय श्रृंगार किए हुए शादी के जोड़े में होती हैं। दूसरे जब वह गर्भवती होती हैं और तीसरे बच्चा होने के बाद के कुछ दिनों में, विशेषकर जब तक दूध मुहा बच्चा दुग्धपान करता है। पीड़ित स्थितियों में तीन बातों का भ्रम बना रहता है, इसलिए यह समझना कठिन हो जाता है कि पीड़ित करने के पीछे कौन से कारक भूमिका निभा रहे हैं। क्योंकि तीनों ही स्थितियों में पीड़िता की स्थिति लगभग एक सी ही रहती है। पीड़ा का कम अथवा अधिक होना तो निर्भर करता है व्यक्ति की मानसिकता और इच्छाश्शक्ति पर। तीन कारणों में एक में अधिकांशतः कह दिया जाता है कि किसी ने 'कुछ' कर दिया ।  दूसरे में कहा जाता है कि किसी दुष्टआत्मा का प्रभाव है और तीसरा तो नज़र दोश है ही।
    जन्मपत्री में जिनके राहु और चन्द्रमा दोषपूर्ण होते हैं तथा जो मानसिक रूप से अपरिवक्व होते हैं अथवा जिनमें इच्छा शाक्ति की कमी होती है, प्रायः उनको नज़र पीड़ा सताती है, ऐसा देखा गया है।
लक्षण क्या हैं नज़र दोष के
    आलस्य, सिर दर्द, किसी कार्य में मन न लगना, हर समय शरीर बिना किसी रोग के रोगी की तरह दिखना। मन अशान्त रहना। प्रसन्नता, हर्ष, उल्लास और उत्साह का पलायन हो जाना। सबसे बड़ा लक्षण है आँखों में सदा भारीपन बना रहना और परिणामस्वरूप उनका सूज जाना। नज़र लगे बच्चे, महिला अथवा किसी इंसान की मात्र आँखे देख कर सहजता से अनुमान लगाया जा सकता है कि वह नज़र दोष से पीड़ित है।
    भवन, कार्य स्थल, दुकान आदि के साथ-साथ घर के जीव-जन्तु और यहाँ तक कि वनस्पति तक पर नज़र दोष का दुष्प्रभाव पड़ता है। किसी एक्वेरियम में मछलियों का मरना, घर की फुलवारी के फल-पौधों का अकस्मात् सूख जाना, घर के पालतू जानवरों का बीमार हो जाना आदि नज़र दोष के सामान्य से लक्षण हैं।
नज़र दोष का तार्किक आधार क्या है
    हमारा शरीर असंख्य रोम कूपों से बना है। यह रोमकूप शरीर के बेकार और विषैले पदार्थ को शरीर से बाहर निकालने का कार्य करते हैं। किन्हीं कारणों से यदि यह छिद्र बन्द हो जाते हैं तो शरीर में प्राकृतिक वायु, सर्दी अथवा गर्मी का आवागमन अवरुद्ध हो जाता है। आन्तरिक और वाह्य तापमान का इससे सामनजस्य बिगड़ जाता है अथवा कहें कि पंच तत्वों का संतुलन बिगड़ जाता है इससे शरीर में लोह तत्व की अधिकता होने लगती है। रोमछिद्र तो क्योंकि बन्द होते हैं इसलिए विषैले तत्व का निष्काशन शरीर के अन्य भागों से, विशेषकर सबसे नाज़ुक अंग आँख के द्वारा होने लगता है। परिणाम स्वरूप आखों की पलके भारी होने लगती हैं, लाल हो जाती है अथवा उनमें सूजन आने लगती है।
    छोटे बच्चे अकस्मात् बीमार हो जाते हैं। खाना-पीना छोड़ देते हैं। रात-रात तक न सोते हैं न ही किसी को सोने देते हैं। रो रो कर बुरा हाल कर देते हैं। अच्छे से अच्छी चिकित्सा के बाद भी कोई प्रभाव बच्चे के स्वास्थ्य पर नहीं पड़ता है। उस समय न मानने वाला भी हारकर मानने लगता है कि बच्चे को नज़र लगी है।
नज़र दोष उपाय का सिद्धांत
    पदार्थ तंत्र में अगर जाएंगे तो इस बात की प्रमाणिकता सामने आ जाएगी कि प्रत्येक प्रदार्थ में अपनी एक ग्राह्य शक्ति होती है और प्रत्येक पदार्थ से हर पल विकरण होता रहता है। यह अनवरत वैज्ञानिक प्रकिया है। कुछ पदार्थ जैसे नींबू, नमक, तेल, फिटकरी, लहसुन, मोर के पंख, सरसों का तेल आदि ऐसे हैं जिनमें नज़र दोष को न्यून करने का प्राकृतिक गुण-धर्म विद्यमान है। इसीलिए नज़र उतारने के लिए इनका प्रयोग अधिकांशतः किया जाता है।
नज़र दोष के सरलतम उपाय
    अगर कहीं लगता है कि कष्टों के पीछे नज़र दोष कारण है और दवा आदि करके आप थककर त्रस्त हो चुके हैं तब पूरी आस्था से निम्न कुछ उपाय अवश्य अपना करे देखें। क्या पता किस उपाय से आपको कहाँ लाभ मिल जाएं।
1. रात्रि सोने से पूर्व नज़र दोष से पीड़ित बच्चा, महिला, पुरूष जो कोई भी है लेट जाए। घर का कोई सदस्य, यदि वह घर का कोई बुजुर्ग हो तो बहुत अच्छा, अपना जूता पीड़ित के ऊपर से घड़ी की विपरीत दिशा में सिर से पांव तक 5, 7, 11 अथवा अधिक बार विषम संख्या में उतार कर कमरे से बाहर जोर से फेक दे। अपने हाथ-पैर धोले और निःशब्द सोने चला जाए।
2. पीड़ित यदि छोटा दूध पीता बच्चा है तो उसके गले में कुछ लहसुन की ताजी कलियाँ एक धागे में माला की तरह पिरोकर उसके गले में धारण करवा दीजिएबच्चे पर नज़र दोष का दुष्प्रभाव नहीं होगा । जब लगे कि कलियाँ सूखने लगें तो उनको ताज़ी से बदल दिया किजिए।
3. एक बिना दाग का एक नींबू लीजिए । पीड़ित व्यक्ति के ऊपर उससे उतारा करिए अर्थात् घड़ी की सुइयों की घूमती दिशा में उसके ऊपर से धीरे-धीरे विषम संख्या में सिर से पांव तक घुमाइए। तीन पिन, एक ऊपर, एक बीच में तथा एक नीचे चुभाकर उसको घर में कहीं रख दीजिए। जैसे-जैसे नींबू सूखेगा। नज़र दोष का दुष्प्रभाव न्यून होने लगेगा। कुछ दिन बाद नींबू को किसी चौराहे पर फेंक कर निःशब्द लौट आइए। यदि प्रभाव में कहीं न्यूनता लगे तो उपाय पुनः दोहरा दीजिए।
4. जो लोग प्रभू में आस्थावान हैं। जिनके घर में नियमित पूजा-पाठ, आरती आदि होती, वहाँ नज़र दोष का प्रभाव तो कभी होता ही नहीं है। बस मन में आस्था अवश्य होना चाहिए । हनुमान जी का किसी भी रूप से ध्यान, आराधना, पूजा, पाठ, जप आदि घर में यदि गूगुल की धूनी के साथ नियमित रूप से किया जाता है, तो वहाँ नज़र दोष का दुष्प्रभाव होगा ही नहीं। पंच मुखी हनुमान जी पंच तत्वों का कारक कहे गए हैं। इन पंच तत्वों में ही अण्ड-पिण्ड का सिद्धांत छिपा है। पंच मुखी हनुमान जी का कोई चित्र भवन, दुकान, घर आदि में कहीं ऐसे स्थान पर लगा लें जहाँ से आते-जाते उनके दर्शन होते रहें। जब पंच तत्वों की शरीर और वातावरण से सन्तुलन बना रहेगा तो नज़र दोष का दुष्प्रभाव तो कभी सताएगा ही नहीं ।
5. घर का रात्रि का खाना सिमट जाने के बाद चांदी की कटोरी में दो लौंग तथा दो कपूर की टिक्की जला दिया कीजिए नज़र दोष के कारण यदि घर की उन्नति प्रभावित हुई है तो वह धीरे-धीरे दूर होने लगेगी।
6. बच्चा यदि नज़र दोष से पीड़ित है तो उसकी लम्बाई के सात कच्चे सूत लेकर सरसों के तेल में अच्छे से भिगोकर तर कर लें। बच्चे के सामने उसको चिमटे, पिन से अथवा कील से पकड़ कर दीवार पर टांग दें। उसके नीचे जल से भरा एक पात्र रख दें। धागे में आग लगा दें और उसका जला भाग जल में टपकने दें। बच्चे से कहें कि एक टक वह यह क्रिया देखता रहे । धागा पूरी तरह से जल जाए तो पात्र का पानी घर से बाहर किसी पेड़ की जड़ में छोड़ दें।
7. यदि रत्नों में विश्वास है तो पीड़ित के गले में ज़बरजद अर्थात् पैरीडोंट नामक रत्न धारण करवा दें।
8. अमावस्या के दिन एक पीले रंग के कपड़े  में साबुत नमक तथा नागकेसर रखकर पोटली बना लें। और यह घर में कहीं सुरक्षित रख लें। कुछ दिनों बाद अमावस्या को ही नए से यह पुनः बदल दिया करें। भवन, घर, दुकान, कार्यालय आदि यदि नज़र दोष से प्रभावित हुआ है तो वह पुनः ठीक होने लगेगा।
9. दुकान, कार्य स्थल आदि में नींबू तथा मिर्च लटकाते हुए प्रायः देखा जाता है। इसको यदि अधिक प्रभावशाली बनाना है तो पहले एक टीन, गत्ते अथवा अन्य का छोटा सा स्वास्तिक काट लें, उसपर आटे से नागकेसर के कुछ दाने चिपका दें। फिर इसके ऊपर क्रमशः एक नींबू तथा पांच या सात डण्डी सहित हरी मिर्च पीरों लें।
10. एक वृक्ष का काला गोल सा एक फल होता है । इसका नाम ही नज़रबट्टू होता है, यह पीड़ित के गले में धारण करवा दें।
11. दो लौंग, दो कपूर की टिक्की तथा थोड़ा सा फिटकरी का टुकड़ा लेकर नज़र दोष से पीड़ित के ऊपर से यह घड़ी की विपरीत दिशा में सिर से पैर तक उतारा करें और घर से बाहर जाकर जला दें। बची राख को अपने पैरों से मसल दें। मन में भावना जगाएं कि बुरी नज़र को अपने पैरों से मसल कर नष्ट कर रहे हैं।
12. छोटा बच्चा, विशेषरूप से नवजात शिशु नज़र दोष से पीड़ित है, सोते में चौककर रोने लगता है। तो ऐसे में श्वेतार्क की जड़ मुंगा, फिटकरी लहसुन, मोर का पंख सब एक कपड़े में सिलकर बच्चे के कमर अथवा गले में धारण करवा दें। नज़र दोष के लिए यह एक बहुत ही प्रभावशाली नज़रबट्टू सिद्ध होगा।



Tuesday, August 11, 2015

कीलन तंत्र द्वारा बनायें सुरक्षा कवच



पूर्व वैज्ञानिक
रुड़की - 247 667(उत्तराखण्ड)
keelna

    भवन की, कार्य स्थल आदि की अथवा व्यक्ति की रक्षा के लिए अनंत काल से रक्षा सूत्र, रक्षा कवच, रक्षा रेखा, रक्षा यंत्र आदि का चलन देखा जाता है। यह सदैव दुर्भिक्षों, अनहोनी घटनाओं, कुदृष्टि, मारण, उच्चाटन, विद्वेषण आदि तांत्रिक प्रयोगों से गुप्त रूप से सुरक्षा का कार्य करते रहे हैं, ऐसी मान्यता है। इस रक्षा-सुरक्षा क्रम-उपक्रम में ही कीलने अथवा कीलन का चलन भी प्रायः देखने को मिलता है। विषय के विद्वान स्थान को भांति-भांति की कीलों से तंत्र क्रियाओं द्वारा कील देते हैं अर्थात् एक सुरक्षा कवच स्थापित कर देते हैं। 

    कीलन सुरक्षा की दृष्टि से तो किया ही जाता है परन्तु इसके विपरीत ईर्ष्या-द्वेष, अनहित की भावना, शत्रुवत व्यवहार आदि के चलते भी स्थान का कीलन कर दिया जाता है। फलस्वरूप उस स्थान को दुर्भाग्य घेरने लगता है और वहाँ से सुख, शांति, सम्पन्नता और प्रसन्नता का कीलन के दुष्प्रभाव स्वरूप पलायन होने लगता है। स्वार्थ वश किये गये इन दुष्परिणामों का सरलता से निदान भी नहीं मिल पाता।
    कोई ज्ञानी व्यक्ति जो केवल निःस्वार्थ भाव रखता है, कीलन का स्थान पता करके उसके प्रभाव को नष्ट कर सकता है। सुरक्षा की दृष्टि से किये गये कुछ प्रयोग पाठकों के लाभार्थ प्रस्तुत कर रहा हूँ, निःस्वार्थ भाव से लाभ उठायें।  

1. बारह अंगुल माप की पलाश की चार लकड़ियाँ लें। उन्हें कील की तरह नुकीला कर लें। ग्यारह माला 'ऊँ शं शां शिं शीं शुं शूं शें शौं शं शः स्वः स्वाहा' मंत्र जपकर भवन, प्रतिष्ठान, दुकान आदि के चारों कोनों में गाड़ दें, वहाँ हर प्रकार से रक्षा होगी।
2. वट वृक्ष की चार अंगुल की चार लटकती हुई जड़, चित्रा नक्षत्र में काट लें। इन्हें चार इंच की लोहे की कील में बाँध दें। घर, प्रतिष्ठान, दुकान आदि के चार कोनों में गड्डा खोदकर पहले नारियल का पानी छिड़क दें फिर इस कीलों को सीधा दबा दें, भवन की सुरक्षा बनी रहेगी।
3. शुभ मुहूर्त में पीपल, श्वेतार्क, सिरस, दूर्वा, खादिर, पलाश, अपामार्ग, शमी, कुश तथा गूलर की चार अंगुल की चार-चार जड़ें लेकर उन्हें एक साथ बाँध लें। भूमि, भवन, प्रतिष्ठान आदि के चारों कोनों में उन्हें सवा हाथ गहरा गड्ढा खोदकर दबा दें। बुरी नज़र, आपदा, दुर्भिक्षों, आदि से आपकी रक्षा बनी रहेगी।

Friday, August 7, 2015

कौड़ी से प्राप्त करें सौभाग्य



गोपाल राजू की पुस्तक 'तंत्रके सरल उपाय' का सार-संक्षेप
अ.प्रा. वैज्ञानिक
सिविल लाइन्स
रुड़की - 247 667

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    एक समुद्री जीव के शरीर का ठोस आवरण कौड़ी कहलाता है। एक समय में इसका व्यापक प्रयोग मुद्रा के चलन के रूप में होता था। समय के साथ-साथ मुद्रा का रूप-रंग बदलता चला गया। तीन-चार दशक पूर्व तक इसका चलन चौसर, चौपड़ आदि खेलों में पासे के रूप में खूब होता था। बच्चों  को कौड़ी से खेलते हुए प्रायः देखा जाता था। जीवों के संरक्षण नियमों के कारण धीरे-धीरे कौड़ी आज प्रायः दुर्लभ हो गयी । तंत्र में हो रहे व्यापक प्रयोग के कारण भी अच्छी श्रेणी की कौड़ी की न्यूनता होने लगी। तथापि् सौभाग्य से उच्च श्रेणी की कौड़ियाँ सुलभ हो जाएं तो आप भी सरल उपायों द्वारा लाभ प्राप्त कर सकते हैं। 
1. लाल कपड़े में एक बड़ी पीली कौड़ी बांधकर अपने कैश बॉक्स में रख लें, आशातीत धन लाभ होने लगेगा।
2. सात पीली कौड़ी, सात हल्दी की अखण्डित गांठ एक पीले रंग के कपड़े में बांधकर घर में स्थापित कर लें। वहाँ सदैव प्रेम, स्नेह और सौहाद्रपूर्ण वातावरण बना रहेगा।
3.काले रंग के कपड़े में एक पीली कौड़ी बांधकर अपने शत्रु के घर में दबा दें। वह मित्रवत् व्यवहार करने लगेगा।
4. बच्चा यदि सोते समय डरता है अथवा दुःस्वन के कारण बेचैन रहता है तो उसके सिरहाने एक पीली बड़ी कौड़ी रख दें। दुष्प्रभाव से उसकी रक्षा होगी ।
5. पूर्णिमा की रात्रि में नौ लाल रंग के गुलाब के फूल, नौ पीली बड़ी कौड़ी के साथ एक लाल रंग के कपड़े में बांधकर अपनी दुकान, कार्यस्थल पर रख लें। आप देखेंगे कि आय और व्यय में सन्तुलन होने लगा है।
6. एक काली कौड़ी तथा हरसिंगार वृक्ष की जड़ पीले कपड़े में बन्द करके ताबीज़ की तरह गले में धारण कर लें। ऋण से उऋण होने का यह एक अच्छा उपक्रम सिद्ध होगा।
7. भवन के बनते समय उसके उत्तर तथा पूर्वी कोने की नीव में ग्यारह पीली बड़ी कौड़ी दबा दें। वास्तु दोष जनित दुष्प्रभावों से भवन की रक्षा बनी रहेगी ।
8. लाल कपड़े में 5 पीली बड़ी कौड़ी दीपावली की रात्रि में अपनी पारम्परिक पूजा-मुहूर्त में लक्ष्मी जी के चरणों में रख दें। एक माला मंत्र, 'ऊँ ऐं श्रीं ह्रीं क्लीं'' की जप करें। प्रातः यह पोटली बनाकर अपनी तिजोरी में रख लें। धन लाभ का यह एक अच्छा उपक्रम सिद्ध होगा।
9. भवन निर्माण के समय ग्यारह कौड़ी तथा पांच हल्दी की गांठ एक काले कपड़े में बांधकर भवन के मुख्य द्वार पर लटका दें। नज़र दोष से भवन की रक्षा होगी।
10. एक बड़ी कौड़ी छेदकर के  काले धागे में पिरोकर बच्चे के गले में धारण करवा दें, नज़र दोष से हो रहे दुष्परिणामों से उसकी रक्षा होगी।
11. 5, 7 अथवा 11 कौड़ी अपने वाहन में पीले कपड़े में लपेटकर रख लें, यह पोटली एक सुरक्षा कवच का काम करेगी। 

Thursday, August 6, 2015

अन्धविश्वास - Superstition

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अन्धविश्वास पर एक अच्छी पुस्तक |
 भ्रम दूर होंगे गोपल राजू (Gopal Raju) की इस एक पुस्तक से
Yantra 
Best Book on Superstition
 

Tuesday, August 4, 2015

गिलोय - एक अमृत बेल



मनासश्री गोपाल राजू की पुस्तक 'तंत्र के सरल उपाय' का सार-संक्षेप


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    जिनको वैकल्पिक आयुर्वेद और प्राकृतिक चिकित्सा में थोड़ा सी भी आस्था है वह गिलोय नामक वनस्पति से अवश्य परिचित होंगे। अपने जीवन दायनी गुणों के भण्डार के कारण इसको अमृत बेल कहा गया है। इसका बोटॅनिकल नाम, 'Tinospora Cordifolia' है। अनेक बीमारियों में इसका उपयोग रामबाण सिद्ध होता है, इसके अनेकों प्रमाण देखने को मिल जाऐंगे।
    गिलोय त्रिदोष नाशक है। औषधीय गुणों के भण्डार इस वनस्पती की विशेषता है कि यह स्वयं कभी भी नहीं मरती। इसका उचित रूप से नियमित उपयोग कर लिया जाए तो यह अकारण किसी असाध्यस रोग के कारण किसी भी जीवन का अन्त नहीं होने देती।
    गुह्य विधाओं के तंत्र श्रेत्र में भी इसका प्रयोग किया जाता है। परन्तु इसका यह गुप्त भेद अधिकांशतः गुप्तादिगुप्त ही है। कुछ सरल से उपाय गिलोय के दे रहा हूँ। यथाश्रद्धा जीवन में अपना कर देखें। क्या पता किसको किस उपक्रम से कहाँ लाभ मिल जाए।
1. गिलोय का एक छोटा सा टुकड़ा त्रिलोह के ताबीज़ में बन्द करके गले में धारण कर लें। नित्य मंत्र, ''ऊँ हौं जूँ सः'' का जप किया करें। दैहिक व्याधियों से आपको चमत्कारी रूप से लाभ मिलेगा।
2. भवन के मुख्य द्वार पर गिलोय की लता लगा लें, सर्पभय से आपको मुक्ति मिलेगी।
3. गिलोय, अपामार्ग तथा नागफनी की जड़े भवन के चारों ओर लगा लें, अनेक व्याधियों तथा वास्तु दोष से भवन की रक्षा होगी।
4. गिलोय का एक टुकड़ा गले में धारण कर लें। यह एक प्रकार से रक्षा कवच का कार्य करेगा।
5. गिलोय के रस में त्रिधातु का छल्ला डुबाकर रख लें । तीन दिन बाद साफ करके उसको बाँये हाथ की कनिष्ठिका में धारण कर लें। यदि किसी रोग में औषधि प्रभावहीन हो रही है तो उसका शीघ्र ही सुप्रभाव दिखाई देने लगेगा।
नोटः गिलोय कभी भी क्रय करके न लगाएं।
यह किसी से प्रसाद स्वरूप ले लें तो और भी अच्छा है। 
गिलोय