Tuesday, March 24, 2015

रेकी चिकित्सा क्या है


30, सिविल लाइन्स
रूड़की - 247 667 (उत्तराखण्ड)

Reiki


    रेकी चिकित्सा अथवा स्पर्श चिकित्सा प्रद्धति के प्रणेता डॉ. निकाओ उसुई को माना जाता है । रेकी एक जापानी शब्द है। 'रे' का अर्थ है - ईश्वरीय सृष्टि अर्थात् ब्रह्माण्ड और 'की' का अर्थ है प्राण ऊर्जा अर्थात् जीवन शक्ति । रेकी का मूल उद्देश्य भी ब्रह्माण्ड से प्राण ऊर्जा को प्राप्त करना है। यह वह ईश्वरीय शक्ति है जो जीवन में जीवत्व का संचार करके उसको स्वस्थ, प्रसन्न और प्राण ऊर्जा से सम्पन्न बनाती है। इसमें दो-तीन दशक से रेकी का व्यापक प्रचार हुआ है। परन्तु देखा जाए तो प्राण ऊर्जा का संचार अनादि काल से महापुरूषों द्वारा किया जाता रहा है। यह ऊर्जा अपनी दृढ़ इच्छा शक्ति, योग साधना, संयमित जीवन, आध्यात्मिक पथ आदि द्वारा स्वयं अर्जित किया गया हो तब तो यह एक अलग विषय है।  परन्तु यह तथ्य छिपा नहीं है कि अन्य किसी के द्वारा जो ज्ञान और उपलब्धि आज व्यवहार में परोसी जा रही है उसमें कितनी मौलिकता है और उसका प्रभाव कितना प्रभावशाली। जो कोई रेकी कर रहा है उसका प्रभाव वस्तुतः उसकी योग्यता, उसकी भावना, उसकी साधना तथा उसके संयम पर पूर्णतया निर्भर करता है। यदि रेकीकर्ता पूर्णतया अपनी पात्रता में परिपक्व है तब तो व्यक्ति में जीवन शक्ति का संचार होगा ही होगा। रेकी ज्ञान का प्रचार भारत से तिब्बत, चीन होते हुए जापान पहुँचा। डॉ. उसुई ने नियम और क्रमानुसार बौद्ध धर्म के साथ-साथ इस दिव्य ज्ञान की दीक्षा ग्रहण की और परम ज्ञान प्राप्त करने के उपरान्त जनहित में इस का व्यापक प्रचार-प्रसार  किया था इसलिए उनको रेकी का आधुनिक जनक भी कहा गया है। रेकी का गुप्त सूत्र स्थूल  नहीं बल्कि सूक्ष्म शरीर में छिपा हुआ है। इस गुप्तादिगुप्त भेद को जब तक नहीं समझा जाएगा तब तक रेकी क्रिया में प्रवीण नहीं हुआ जा सकता ।