Saturday, January 31, 2015

हृदय में बसाकर देखें प्रणव ॐ


मानसश्री गोपाल राजू (वैज्ञानिक)

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मंत्र, यंत्र और तंत्र एक ही शक्ति के तीन रुप हैं। इनमें से मंत्र का संसार सबसे प्राचीनतम, विचित्र और प्रभावशाली है। सृष्टि से पहले जब कुछ भी नहीं था तब वहॉ एक ध्वनि मात्र ही सब जगह व्याप्त थी। वह ध्वनि, प्रतिध्वनि, नाद, निनाद आदि एक शब्द था, एक स्वर था। वह शब्द एक स्वर-लय पर आधारित था। वह ध्वनि अथवा नाद आदि और कुछ नहीं वस्तुतः ओउम् था। ओउम् में कुल तीन अक्षर हैं - अ, उ और म। आकार से विराट अग्नि, विष्णु आदि से अर्थ लिया जाता है। 

पुनर्जन्म शास्त्रोक्त है और वैज्ञानिक भी




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    पुनर्जन्म हमारी भारतीय संस्कृति के साथ-साथ ज्ञान का एक भौतिक सिद्धांत है। शरीर की मृत्यु के साथ शरीरगत आत्मा मृत न होकर, उस देह में प्राप्त संस्कारों के साथ दूसरे देह अथवा कहें कि भौतिक शरीर में चला जाता है। इस युक्ति-युक्त सिद्धांत को ही पुनर्जन्म का सिद्धांत कहते हैं। 

काम, सहवास और श्रेष्ठ संतान प्राप्ति



मानसश्री गोपाल राजू (वैज्ञानिक)



(संतान कामना इच्छुक प्रत्येक दम्पत्ति के लिए आवश्यक एवं उपयोगी लेख)

      भारतवर्ष में जैसे आचार्य वात्सायन मुनि का कामसूत्रकामशास्त्र का प्रसिद्ध ग्रंथ है, उसी प्रकार यूरोप तथा पश्चिमी देशों में कामशास्त्र सम्बन्धी हैवेलक एलिस का साइंस ऑफ सैक्सग्रंथ कुल सात भागों में चचिर्त है। रति, काम, सम्भोग आदि नाम आते ही सामान्य मनुष्य के मन में अश्लीलता का चित्रण होने लगता है। अज्ञानतावश ऐसी भावना उत्पन्न होना स्वाभाविक भी है।

Thursday, January 29, 2015

संत मन

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 अंदर का संत मन ज़ोर मारता है 
दूसरा बदमाश मेरा 'मैं
भगवा अपनाकर अपना क़द बढ़ाने का ज़ोर देता है 
भगवा अपनाता हूँ तो सब मैला ही मैला दिखाई देता है 


चैतन्य करें अपना तेजोवलय

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पेशे से वैज्ञानिक और गुह्य विधा चिन्तक/शोधकर्ता गोपाल राजू

के सारगर्भित लेख पढने के लिए कृपया वेब :
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आचार्य श्री राम शर्मा जी के अनुसार, ‘कर्णेन्द्रिय से नाद योग सुना है। अंतःदृष्टि से अंतमुखी होकर ध्यान योग द्वारा सूक्ष्म शरीर के अंतरंग के किसी भाग के दर्शन किए जाते हैं। उसी प्रकार ज्ञान चक्षुओं से देवी सम्पन्न पुरुषों के, अधिकांशतः मुख के आस-पास तेजोवलय देखा जाता है। चुम्बकीय गुण के सदृष्य प्रचंड प्रतिभा सम्पन्न व्यक्तियों में भी मानवीय विद्युत का असीम भण्डार रहता है, जिसके संपर्क में आने पर ज्ञान, प्रेरणा एवं मार्गदर्शन प्राप्त होता है। इसमें तेजोवलय ही प्रमुख है। महामानवों के दर्शन, आशिर्वचन, दृष्टिपात में तो सत्परिणाम रहते ही हैं, उनमें उनका यही प्रकाशपुंज भी कार्य करता है।

क्या है तेजोवलय

Wednesday, January 28, 2015

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भगवन्नाम रटन में ही परम आनंद है









    



भगवन्नाम रटन में ही परम आनंदहै


जब समस्त क्रम-उपक्रम आदि लौकिक उपाय निष्फल होने लगते हैं और हम अपने आप को दुर्बल, दीन-हीन, अनाथ, विवश, निराक्षित और असहाय अनुभव करने लगते हैं तो उस समय श्री भगवन्नाम ही अंततः एक मात्र सहारा दिखाई देने लगता है। विपरीत बन गयी या बन रही उन परिस्थितियों में सौभाग्य से हमारी जिह्वा पर यदि श्री भगवन्नाम आ जाता है तब तो हमें जैसे डूबते को तिनके का सहारा मिल जाता है अन्यथा दैहिक और